प्रस्तावना
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(23)(झ) भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 से "फर्म" का अर्थ ग्रहण करती है। भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 4 निम्नानुसार फर्म को परिभाषित करती है :
"व्यक्ति, जो अन्य के साथ सांझेदारी करता है, को व्यक्तिगत "सांझेदार" कहते हैं तथा समग्र रूप से "एक फर्म" तथा नाम जिसके अंतर्गत उनका व्यापार संचालित होता है को "फर्म का नाम" कहते हैं।
फर्म में सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 में परिभाषित सीमित देयता भागीदारी शामिल होगी। सीमित भागीदारी देयता अधिनियम, 2008 की धारा 2(1)(ढ) अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत तथा निर्मित भागीदारी के तौर पर "सीमित देयता भागीदारी" को परिभाषित करती है।
- स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?
- स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?
- प्रत्येक व्यक्ति जो किसी व्यापार अथवा पेशे का निष्पादन करता है जिसकी कुल बिक्री, कारोबार अथवा सकल प्राप्ति किसी भी पिछले वर्ष में पांच लाख से अधिक है अथवा अधिक होने की संभावना हैं
- प्रत्येक व्यक्ति जो निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन को करने का इच्छुक हैं जहां पैन को उद्धृत करना अनिवार्य हैं
- स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?
- स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क है ?
- स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना ?
- देश, जहां आवेदक स्थित है, में जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति, "सुधारक"(उस देश के संबंध में जो हेग अपोस्टिल सम्मेलन 1961 के हस्ताक्षरकर्ता हैं) अथवा भारतीय दूतावाास अथवा उच्चायोग अथवा देश जहां आवेदक स्थित हैं में कांसुलेट अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंक की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित।
- भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन
- स्थिति का पता लगाएं
- संपर्क सहायता
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
स्थाई खाता संख्या
स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?
पैन का अर्थ है स्थाई खाता संख्या। स्थाई खाता संख्या आयकर विभाग द्वारा जारी दस अंकों की अक्षरांकीय संख्या हैं। पैन को लैमिनेटिड प्लास्टिक कार्ड के प्रारूप में जारी किया जाता हैं (साधारण पैन के तौर पर प्रसिद्ध)। नीचे दिया गया पैन का वर्णन है : एएलडब्ल्यूएफजी5809एल
स्थाई खाता संख्या का चतुर्थ अक्षर स्थाई खाता संख्या धारक की स्थिति को दर्शाता हैं। एक सांझेदार फर्म को शब्द "एफ" से प्रदर्शित किया जाता है। (एएलडब्ल्यूएफजी5809एल)
स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?
स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त किया जाना है :
पैन नीचे दिए व्यक्तियों को प्राप्त करना पड़ता है-
• प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान निर्धारणीय है, उस अधिकतम राशि से अधिक हो जिसे कर में प्रभार्य नहीं किया गया हो।
• एक धर्मार्थ न्यास जिसे प्रत्येक व्यक्ति जो कोई भी व्यवसाय या कारोबार कर रहा हो जिसका कुल बिक्री हो, के तहत 139(4क) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना होता है.टर्नओवर.या सकल प्राप्तियां पूर्व वर्ष में प्रत्येक आयातक/निर्यातक को पांच लाख रुपए से अधिक होने की संभावना है या इसकी संभावना है जो हर व्यक्ति के लिए आयात निर्यात कोड प्राप्त करना चाहता है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।
• उपर्युक्त में से किसी में शामिल नहीं किया गया कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है। प्रत्येक गैर-व्यक्तिगत निवासी व्यक्ति और उनसे संबद्ध व्यक्ति उस स्थिति में पैन के लिए आवेदन कर सकता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन में रु. 2,50,000 से अधिक हो।
स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें?
1) ऑनलाइन आवेदन - ऑनलाइन आवेदन यूटीआईआईटीएसएल या प्रोटेन (पहले NSDL eGov के तौर पर ज्ञात) की वेबसाइट से किया जा सकता है
ऑनलाइन आवेदन के लिए क्लिक करें
2) स्थाई खाता संख्या आवेदन केंद्र के माध्यम से - पैन के लिए आवेदन निम्न जगह पर जमा किया जा सकता है
(क) प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई-गर्वे के तौर पर ज्ञात)(ख) UTITSL
स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क है ?
भारतीय पते पर संप्रेषण के लिए पैन के आवेदन के लिए शुल्क रू. 110 (रू. 93 का आवेदन शुल्क + 18 प्रतिशत जीएसटी) है और विदेशी पते पर संप्रेषण के लिए रू. 1020 (जीएसटी) है
स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना ?
भारत में सांझेदार फर्म को पैन आवेदन पत्र के साथ सांझेदारी विलेख की प्रति अथवा फर्म के पंजीयक द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति को जमा कराना होगा।
सांझेदार फर्म के भारत से बाहर गठित होने की स्थिति में, उसे पैन आवेदन प्रपत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा :
स्थिति का पता लगाएं
आवेदक आवेदन पत्र की स्वीकृति पर उत्कृष्ट संख्या सन्निहित पावती संख्या को प्राप्त करेगा। यह पावती संख्या उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति का पता लगाए सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अव संरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) पर नजर रखने के लिए प्रयुक्त की जा सकती हैं।
संपर्क सहायता
आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है
| विधि आयकर विभाग | राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड, | यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड | |
| वेबसाइट | www.incometaxindia.gov.in | https://www.protean-tinpan.com/ | www.utiitsl.com |
| कॉल सेंटर | 08069708080 | ||
| ई-मेल आईडी | tininfo@proteantech.in | ||
| पता |
प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) |
यूटीआई इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्नालॉजी एंड सर्विस लिमिटेड, |
यदि आपका स्थाई खाता संख्या (पैन) कार्ड खो जाए ?
अगर पैनकार्ड खो जाए तो आप डुप्लीकेट पैनकार्ड के लिए"नए पैनकार्ड के लिए प्रार्थना या/ और पैनकार्ड के डेटा में बदलाव या सुधार"फॉर्म भरकर प्रस्तुत कर सकते हैं, और उसके साथ एफ आई आर की कॉपी लगायी जा सकती है। अगर पैनकार्ड खो गया और आपको पैन याद नहीं है तो आयकर विभाग द्वारा दी गयी"अपना पैन जानो" की सुविधा से पैन का पता लगाया जा सकता है। यह सुविधा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in से मिल सकती है।
पैन की ऑनलाइन जानकारी नाम, पिता का नाम और जन्म तिथि जैसे कोर विवरण देने से मिल सकती है। पैन जानने के बाद आप डुप्लीकेट पैन के लिए "नए पैनकार्ड के लिए प्रार्थना या/ और पैनकार्ड के डेटा में बदलाव या सुधार"फॉर्म भरकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
स्थाई खाता संख्या (पैन) कार्ड को प्राप्त करने के क्या लाभ हैं ?
पैन आयकर विभाग से हर लेन-देन के लिए अनिवार्य किया गया है। यह अनेक वित्तीय लेन-देन के लिए भी अनिवार्य है, जैसे बैंक में खाता खोलने, संस्थागत वित्तीय ऋण लेना, उच्चतम उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद, विदेशी यात्रा, अचल संपत्ति का लेन-देन, प्रतिभूतियों के व्यवसाय इत्यादि। पैन एक महत्पूर्ण फोटो पहचान है जिसे देश की सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं मानती हैं।
क्या प्रपत्र 49क/49कक में निर्धारण अधिकारी को उपबंधित करना अनिवार्य हैं ?
हाँ, फॉर्म 49क/49कक में आकलन अधिकारी (एओ ) कोड देना आवश्यक है आकलन अधिकारी के क्षेत्राधिकर के एओ कोड को (यानि एरिया कोड, एओ टाईप, सीमा(रेंज) कोड और (एओ) संख्या) आवेदक को भरनी चाहिए। इसका विवरण आयकर विभाग के दफ्तर या पैन केंद्र से या पैन सेवा प्रदाता की वेबसाइट (a) Protean (formerly NSDL eGov) (b) UTITSLwww.utiitsl.com or https://www.protean-tinpan.com/ से प्राप्त करी जा सकती है।
स्थाई खाता संख्या से संबंधित प्रावधानों के साथ अनुपालन न करने के लिए क्या जुर्माना हैं ?
धारा 272ख में करदाता द्वा रा पैन से संबधित प्रावधानों के अनुपालन नहीं करने पर दंड का प्रावधान है, यानि पैन लेने का उत्तरदायी होते हुए भी पैन नहीं प्राप्त करना, या किसी निर्धारित दस्तावेज पर, जिसमे पैन उद्धृत करना अनिवार्य है, उसमे जानबूझ कर गलत पैन देना, या कर की कटौती करने वाले को या कर लेने वाले को गलत पैन देने पर धारा 272ख के अंतर्गत रु.10,000 का जुरमाना लगाया जा सकता है।
क्या एक व्यक्ति एक से अधिक स्थाई खाता संख्या (पैन) रख सकता है ?
एक व्यक्ति एक से अधिक पैन नहीं रख सकता। यदि एक व्यक्ति को पैन आवंटित हो गया है, तो वह दूसरे पैन की प्राप्ति के लिए आवेदन नहीं कर सकता। 1961 के आयकर अधिनियम धारा 272ख के अंतर्गत एक से अधिक पैन रखने पर रु. 10,000 के जुर्माने का प्रावधान है।
अगर एक व्यक्ति को एक से अधिक पैन आवंटित हो गया है तो उसे तुरंत अतिरिक्त पैन कार्ड या कार्डों को तुरंत वापिस कर देना चाहिए।
क्या पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है?
हर उस व्यक्ति को पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है जो आधार नंबर प्राप्त करने के योग्य है। यदि व्यक्ति के पास आधार नंबर न हो तो आधार नामांकन आईडी दी जा सकती है।
टिप्पणी : प्रभावी तिथि 01.10.2024 से आधार प्रपत्र की नामांकन संख्या को उद्धृत नहीं किया जा सकेगा। करदाता को पैन आवेदन पत्र में अपने आधार नंबर को उद्धृत करना आवश्यक है।
- गृह संपत्ति से आय
- गृह संपत्ति में उसका कोई भवन अथवा भूमि सन्निहित होनी चाहिए;
- करदाता संपत्ति का मालिक होना चाहिए;
- गृह संपत्ति करदाता द्वारा निष्पादित व्यापार अथवा पेशे के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त नही किया जाना चाहिए।
- व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- पिछले वर्ष के दौरान किसी समय निर्धारिती द्वारा निष्पादित किसी व्यापार अथवा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- किसी निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त अथवा शेष कोई मुआवजा अथवा अन्य भुगतान
- पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
- पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए। अन्य शब्दों में, स्थानांतरित परिसंपत्ति स्थानांतरण की तिथि पर पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए;
- यह पिछले वर्ष के दौरान करदाता द्वारा हस्तांतरित होना चाहिए;
- स्थानांतरण के परिणामस्वरूप लाभ अथवा प्राप्ति होनी चाहिए
- अन्य स्त्रोतों से आय
शीर्ष आय
गृह संपत्ति से आय
कराधान के लिए शर्तें
व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
निम्नलिखित आय व्यापार तथा पेशे से शीर्ष लाभ तथा प्राप्ति के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय हैं :
पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
प्रभार्यता के लिए शर्तें:
अन्य स्त्रोतों से आय
अन्य आय जो किसी अन्य शीर्ष आय के अंतर्गत वसूलनीय नही है तथा जो कुल आय से बाहर नही है, विषय "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत शेष आय हेतु वसूलनीय होगी।
- प्रपत्र 26थख भरने के चरण
- प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण
- स्थाई खाता संख्या का प्रयोग करते हुए करदाता के तौर पर पंजीकृत हो व ट्रेसेज पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) पर लॉगिन करें।
- ''डाउनलोड'' मेनू के तहत ''प्रपत्र 16ख (क्रेता के लिए)'' का चयन करें।
- संपत्ति लेनदेन से संबंधित विवरण दर्ज करें जिसके लिए प्रपत्र 16ख का अनुरोध किया जा रहा है। निर्धारण वर्ष, अभिस्वीकृति संख्या, विक्रेता की स्थाई खाता संख्या दर्ज करें और ''आगे बढ़ें'' पर क्लिक करें।
- एक संपुष्टि स्क्रीन दिखाई देगी। आगे बढ़ने के लिए ''अनुरोध सबमिट करें'' पर क्लिक करें।
- डाउनलोड अनुरोध प्रस्तुत करने पर एक सफलता संदेश दिखाई देगा। डाउनलोड अनुरोध के लिए खोज करने के लिए कृपया अनुरोध संख्या नोट करें।
- अनुरोध फाइलों को डाउनलोड करने के लिए ''अनुरोध डाउनलोड'' पर क्लिक करें।
- अनुरोध संख्या के साथ अनुरोध खोजें। अनुरोध पंक्ति का चयन करें और ''एचटीटीपी डाउनलोड'' बटन पर क्लिक करें।
I. प्रपत्र 26थख भरने के चरण:
1. वेबसाइट-फाइलिंग पोर्टल https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ पर लॉग आन करें।
2. ई-फाइल टैब के अंतर्गत, "ई-कर भुगतान " पर क्लिक करें
3. फिर "नए भुगतान " पर क्लिक करें
4. 26थख (संपत्ति की बिक्री पर टीडीएस) फील्ड के अंतर्गत 'आगे बढ़ें' को चुने
पूरा प्रपत्र भरें जैसा लागू हो ।
(प्रपत्र 26थख भरते समय उपयोगकर्ता को निम्न जानकारी के साथ तैयार रहना चाहिए) :
क. विक्रेता की आवासीय स्थिति
ख विक्रेता और खरीदार की स्थाई खाता संख्या
ग विक्रेता और खरीदार के पते का विवरण
घ संपत्ति का विवरण
ड़ भुगतान/जमा की गई राशि और जमा कर का विवरण
6. जमा करने के बाद, अगला पेज आपसे भुगतान की विधि को चुनने को पूछेगा यानी
क. नेट बैंकिंग
ख़ डेबिट कार्ड
ग बैंक काउंटर पर भुगतान
घ आरटीजीएस/एनईएफटी या
ड़ भुगतान गेटवे
7. उपयुक्त भुगतान विधि को चुनें और भुगतान को जारी रखें
सफल भुगतान पर सीआईएन, भुगतान विवरण और बैंक का नाम जिसके माध्यम से ई-भुगतान किया गया है, शामिल करते हुए चालान प्रतिपर्ण प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रतिपर्ण किए गए भुगतान का प्रमाण है।
प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के 5 दिन बाद ट्रेसेज (TRACES) पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) के लिए आगे बढ़ें।II. प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण :
ट्रेसेज वेबसाइट पर 'संपत्ति की बिक्री पर स्रोत पर कर कटौती' के पेज पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
- कर की दर क्या हैं ?
- कर का भुगतान कैसे करें ?
- वास्तविक विधि - नामित बैंक में चालान की हार्ड प्रति की प्रस्तुति द्वारा भुगतान
- ई-भुगतान विधि अर्थात् इलैक्ट्रानिक विधि का प्रयोग करके भुगतान करना
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
कर भुगतान
कर की दर क्या हैं ?
क) आयकर:एक फर्म अपनी कुल आय पर 30 प्रतिशत की सीधी दर पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है
अधिभार : आयकर (जैसा कि ऊपर आंका गया है) की राशि ऐसे कर के 10 प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा आगे बढ़ाई जाएगी जहां कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक होती है। हालांकि, अधिभार सीमांत राहत के अनुसार होगा (आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो एक करोड़ रूपए से अधिक है, के मुकाबले एक करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी)
स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर : आयकर और लागू होने वाल अधिभार की राशि को ऐसे आयकर और अधिभार के क्रमश: चार प्रतिशत की दर पर गिने गए स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर द्वारा और बढ़ाया जाएगा।
ख) वैकल्पिक न्यूनतम कर :एलएलपी द्वारा देययोग्य कर धारा 115ञग के अनुसार "समायोजित कुल आय" के 18.5 प्रतिशत (अधिभार, शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर द्वारा बढ़ाकर) से कम नहीं हो सकता।
कर का भुगतान कैसे करें ?
कर निम्नलिखित किसी भी विधि में दिया जा सकता हैं :
किसे अग्रिम कर का भुगतान करना है ?
प्रत्येक व्यक्ति जिसकी वर्ष के लिए अनुमानित कर देयता रू. 10,000 अथवा अधिक है अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। हालांकि निम्नलिखित व्यक्ति अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं भले ही उनकी कर देयता रू. 10,000 अथवा अधिक हो :
व्यक्ति अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं
अग्रिम कर को वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर का निम्नानुसार किश्तों में भुगतान किया जाना है :
| स्थिति | 15 जून तक | 15 सितम्बर तक | 15 दिसंबर तक | 15 मार्च तक |
| करदाता (उनको छोड़कर जिन्होंने धारा 44कघ की काल्पनिक कराधान योजना को चुना है) | अग्रिम कर के 15 प्रतिशत तक | अग्रिम कर के 45 प्रतिशत तक | अग्रिम कर के 75 प्रतिशत तक | अग्रिम कर के 100 प्रतिशत तक |
| करदाता (जिन्होंनेधारा 44कघ की काल्पनिक कराधान योजना को चुना है) | शून्य | शून्य | शून्य | अग्रिम कर के 100 प्रतिशत तक |
31 मार्च तक दिए गए किसी भी कर को अग्रिम कर के तौर पर समझा जाएगा।
अग्रिम कर को प्रासंगिक कॉलम, अर्थात् अग्रिम कर पर चिन्ह लगाकर आईटीएनएस 280 चालान के माध्यम जमा किया जाना है।
टिप्पणी:
धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित कराने के लिए जिम्मेदार है।
- क्या आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?
- आय की विवरणी के लिए कौनसा प्रपत्र प्रयोग किया जाएगा ?
- क्या विवरणी का ई-दाखिलीकरण अनिवार्य है ?
- Due dates for filing of return?
- फर्म द्वारा विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि निम्नानुसार हैं
क्या आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?
हां, प्रत्येक सांझेदारी फर्म को आय अथवा हानि की राशि के बावजूद आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है।
आय की विवरणी के लिए कौनसा प्रपत्र प्रयोग किया जाएगा ?
फर्म आईटीआर 5 में अपनी आय की विवरणी को दाखिल कर सकता है
| आईटीआर | विवरण | |
| आईटीआर 4 | आईटीआर 4 उन निवासी व्यक्तियों, एचयूएफ, और फर्मों (एलएलपी के अलावा) के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी व्यावसायिक आय या पेशे से आय है जो धारा 44कघ, 44कघक या 44कङ के तहत संगणित की जाती है और जिनकी धारा 112क के तहत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ है, बशर्ते यह लाभ 1.25 लाख रुपये तक हो। | पीडीएफ |
| आईटीआर 5 | (i) व्यष्टि (ii) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब (iii) कंपनी और (iv) प्ररूप आईटीआर-7 फाईल करने वाले व्यक्ति से भिन्न व्यक्ति | पीडीएफ |
क्या विवरणी का ई-दाखिलीकरण अनिवार्य है ?
फर्म के लिए डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है। एक फर्म इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत आय की विवरणी को भी दाखिल कर सकता है। हालांकि, धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों का अंकेक्षण कराने के लिए उत्तरदायी फर्म को डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी को प्रस्तुत करना आपेक्षित है
The due dates for filing of return by a partnership firm are as follows:
Particulars Due Dates
a) 30th November in case of TP audit is required.
b) 30th November If partner in a firm who is liable for TP audit.
c) 31st October in case of a tax audit is required.
d) 31st August if firm has income from business or profession and tax audit is not required
e) 31st July in any other case.
फर्म द्वारा विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि निम्नानुसार हैं :
| ब्यौरेवार | नियत तिथि |
| फर्म जिन्हें आयकर अधिनियम अथवा अन्य किसी कानून के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित कराने की आवश्यकता है, के लिए | निर्धारण वर्ष की 31 अक्टूबर |
| फर्म जिन्हें धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, के लिए | निर्धारण वर्ष की 30 नवंबर |
| अन्य किसी मामले में | निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई। |
- प्रतिदाय/मांग स्थिति देखें
- प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
- यूजर आईडी, पासवर्ड के साथ ई-दाखिलीकरण वेबसाइट पर लॉगिन करें
- सेवाओं पर जाएं और “प्रतिदाय पुनः जारी करें” पर क्लिक करें
- प्रतिदाय पुनःनिर्गम अनुरोध करें
प्रतिदाय
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध हेतु, कृपया निम्न चरणों का अनुसरण करें:
अपील
आयकर देयता पहले निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारित होती है। निर्धारण अधिकारी की विभिन्न कार्यवाहियों द्वारा असंतुष्ट करदाता आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपील को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अधिमत किया जा सकता है। पर्याप्त कानूनी प्रश्न पर, आगे की अपील उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल की जा सकती है चाहें तो उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी की जा सकती है। अपीलीय प्राधिकरण के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अपील संबंधी प्रक्रियाएं निम्नानुसार परिभाषित है:
- एक सांझेदार को कितना पारिश्रमिक अथवा ब्याज का भुगतान किया जा सकता हैं ?
- बही लाभ के प्रथम रू. 6 लाख पर अथवा हानि की स्थिति में - रू. 3,00,000 अथवा बही लाभ का 90 प्रतिशत, जो भी अधिक हो,
- बही लाभ के शेष पर - बही लाभ का 60 प्रतिशत
- सांझेदार को दिए गए वेतन अथवा ब्याज की कटौती
- (क) बही लाभ के प्रथम रू. 6 लाख पर अथवा हानि की स्थिति में - रू. 3,00,000 अथवा बही लाभ का 90 प्रतिशत, जो भी अधिक हो;
- (ख) बही लाभ के शेष पर - बही लाभ का 60 प्रतिशत
सहभागी पारिश्रमिक
एक सांझेदार को कितना पारिश्रमिक अथवा ब्याज का भुगतान किया जा सकता हैं ?
(क) सांझेदार को ब्याज का भुगतान सांझेदारी विलेख की शर्तो के अनुसार किया जाएगा। हालांकि यह 12 प्रतिशत प्रति वर्ष से अधिक नही होगा;
(ख) सांझेदार हेतु देययोग्य पारिश्रमिक सांझेदारी विलेख की शर्तो के अनुसार किया जाएगा। हालांकि यह निम्नलिखित सीमा से अधिक नही होगा;
सांझेदार को दिए गए वेतन अथवा ब्याज की कटौती
अपने सांझेदार को सांझेदार फर्म द्वारा दी गई निम्नलिखित राशि ऐसी फर्म की कटौती के तौर पर स्वीकार्य नहीं होगी:
(1) गैर-कार्यरत सांझेदार को दिए गए वेतन, बोनस, कमीशन अथवा पारिश्रमिक;
(2) सांझेदार को दिया गया पारिश्रमिक अथवा ब्याज जो सांझेदारी विलेख की शर्तो के अनुसार नही हैं
(3) यदि सांझेदार को दिया गया पारिश्रमिक अथवा ब्याज सांझेदारी विलेख की शर्तों के अनुसार हैं लेकिन वें सांझेदारी विलेख की तिथि की किसी पूर्व अवधि से संबंधित हैं
(4) सांझेदार को दिया गया ब्याज सांझेदारी विलेख की शर्तों के अनुसार हैं लेकिन यह 12 प्रतिशत प्रति वर्ष से अधिक है
(5) सांझेदार को दिया गया पारिश्रमिक सांझेदारी विलेख के अनुसार हैं लेकिन यह निम्नलिखित स्वीकार्य सीमा से अधिक हैं;
टिप्पणी :
'बही लाभ' अर्थात् फर्म के समस्त सांझेदारों को दिया गया अथवा देययोग्य पारिश्रमिक की कुल राशि को बढ़ाकर 'व्यापार अथवा पेशे' शीर्षक के अंतर्गत आंके गए निविल लाभ हैं यदि ऐसी राशि निविल लाभ की गणना के समय काटा जाता है।

