1[वे मामले और परिस्थितियां जिनमें किसी व्यक्ति को एक दिन में दस हजार रुपए से अधिक की रकम में भुगतान या कुल भुगतान किसी बैंक के नाम लिखे गए पाने वाले के खाते में देय चैक से या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट से या बैंक खाते के माध्यम से इलेक्ट्रोनिक समाशोधन प्रणाली के उपयोग से या नियम 6कखखक में यथा विहित ऐसे अन्य इलेक्ट्रोनिक प्रणाली के माध्यम से किया जा सकेगा।]
6घघ. धारा 40क की उपधारा (3) के अधीन वहां इंकार नहीं किया जाएगा और धारा 40क की उपधारा (3क) के अधीन किसी संदाय को कारबार या वृत्ति का लाभ और अभिलाभ नहीं समझा जाएगा जहां इसमें विनिर्दिष्ट मामलों और परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को दिन में किया गया कोई संदाय या सकल संदाय, जो किसी बैंक के नाम लिखे गए 2[पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट या बैंक खाते के माध्यम से इलेक्ट्रोनिक समाशोधन प्रणाली या नियम 6कखखक में यथा विहित ऐसे अन्य इलैक्ट्रोनिक रीति के माध्यम से, दस हजार रुपए से अधिक], अर्थात:–
(क) जहां संदाय निम्नलिखित को किया जाता है–
(i) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग) में यथापरिभाषित भारतीय रिजर्व बैंक या किसी बैंककारी कंपनी को;
(ii) भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 2 में यथापरिभाषित भारतीय स्टेट बैंक या किसी समनुषंगी बैंक को;
(iii) किसी सहकारी बैंक या भूमि बंधक बैंक को;
(iv) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 56 के अधीन यथापरिभाषित किसी प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी या कोई प्राथमिक प्रत्यय सोसाइटी को;
(v) जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम को;
(ख) जहां संदाय सरकार को किया जाता है और उसके द्वारा बनाए गए नियमों के अंतर्गत वहां ऐसा संदाय वैध मुद्रा में किया जाना अपेक्षित है ;
(ग) जहां संदाय–
(i) किसी बैंक के माध्यम से प्रत्यय-पत्र व्यवस्था;
(ii) किसी बैंक के माध्यम से डाक या टैलीग्राफिक अंतरण;
(iii) किसी एक बैंक में किसी खाते से उसी या किसी अन्य बैंक में किसी अन्य खाते में बही समायोजन;
(iv) केवल किसी बैंक को भुगतान योग्य बनाए गए विनिमय पत्र;
(v) 3[***]
(vi) 3[***]
(vii) 3[***]
द्वारा किया जाता है।
स्पष्टीकरण - इस खंड और खंड (छ) के प्रयोजनों के लिए ''बैंक'' पद से खंड (क) के उपखंड (i) से उपखंड (iv) में निर्दिष्ट कोई बैंक, बैंककारी कंपनी या सोसाइटी अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत कोई ऐसा बैंक (जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग) में यथापरिभाषित बैंककारी कंपनी4 नहीं है) चाहे वह निगमित हो या नहीं, जो भारत से बाहर स्थापित किया गया है;
(घ) जहां संदाय निर्धारिती द्वारा प्रदाय किए गए किसी माल या उसके द्वारा दी गई सेवाओं के लिये आदाता द्वारा उपगत किसी देनदारी की रकम के प्रत्यय समायोजन के माध्यम से ऐसे आदाता को किया जाता है;
(ड़) जहां संदाय–
(i) कृषि या वन उपज; या
(ii) पशुपालन (जिसके अंतर्गत पशुधन, मांस, चर्म और खाल भी हैं) या डेयरी या कुक्कुट पालन का उत्पादन; या
(iii) मत्स्य या मत्स्य उत्पाद; या
(iv) बागवानी या मधुमक्खी पालन के उत्पादों,
के व्यय के लिए ऐसी चीजों, उत्पादन या उत्पादों के खेतिहर, उगाने वाले या उत्पादक को किया जाता है;
(च) जहां ऐसा संदाय ऐसे उत्पादकों के उत्पादक को किसी कुटीर उद्योग में विद्युत की सहायता के बिना विनिर्मित या प्रसंस्कृत उत्पादों के क्रय के लिए किया जाता है;
(छ) जहां ऐसा संदाय, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो ऐसे किसी ग्राम या कस्बे में मामूली तौर पर निवास करता है या कोई कारबार, व्यवसाय या वृत्ति चला रहा है, ऐसे ग्राम या कस्बे में किया जाता है जो कि भुगतान की तारीख को किसी बैंक द्वारा सेवित नहीं है;
(ज) जहां कोई संदाय, उपदान, छंटनी, प्रतिकर या समरूप सेवांत प्रसुविधा के माध्यम से निर्धारिती के किसी कर्मचारी या किसी ऐसे कर्मचारी के उत्तराधिकारियों को ऐसे कर्मचारी की सेवानिवृत्ति, छंटनी, त्यागपत्र, निर्मुक्ति या मृत्यु पर या उसके संबंध में किया जाता है वहां ऐसे कर्मचारी या उसके उत्तराधिकारी को संदेय ऐसी रकम का योग पचास हजार रुपए से अधिक नहीं है;
(झ) जहां संदाय किसी निर्धारिती द्वारा अधिनियम की धारा 192 के अधीन के उपबंधों के अनुसार वेतन से आय-कर की कटौती करने के पश्चात् अपने कर्मचारी को वेतन के रूप में किया जाता है और जब ऐसा कर्मचारी–
(i) अपने कर्तव्य के सामान्य स्थान से भिन्न किसी स्थान पर या पोत पर पंद्रह दिन या अधिक की निरंतर अवधि के लिए तैनात किया गया हो; और
(ii) ऐसे स्थान या पोत पर किसी बैंक में कोई खाता नहीं रखता है;
(ञ) 5[***]
(ट) जहां संदाय किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा अपने ऐसे अभिकर्ता68 को किया जाता है जिससे ऐसे व्यक्ति की ओर से माल या सेवाओं के लिए नकद भुगतान कराया जाना अपेक्षित है;
(ठ) जहां संदाय किसी प्राधिकृत व्यवहारी या धन प्रवर्तक द्वारा अपने कारबार के सामान्य अनुक्रम में विदेशी मुद्रा या यात्री चैक के क्रय के लिए किया जाता है।
स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए "प्राधिकृत व्यवहारी" या "धन प्रवर्तक" पद से तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन विदेशी मुद्रा या विदेशी विनिमय में व्यवहार करने के लिए किसी प्राधिकृत व्यवहारी या धन परिवर्तक के रूप में प्राधिकृत व्यक्ति अभिप्रेत है।
1. आय-कर (तीसरा संशोधन) नियम, 2020 द्वारा 29.1.2020 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व पार्श्व शीर्षक निम्न प्रकार था।
"वे मामले और परिस्थितियां जिनमें किसी व्यक्ति को एक दिन में बीस हजार रुपए से अधिक की रकम में भुगतान या कुल भुगतान किसी बैंक के नाम लिखे गए पाने वाले के खाते में देय चैक से या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट से अन्यथा भिन्न रूप में किया जा सकता है"
2. आय-कर (तीसरा संशोधन) नियम, 2020 द्वारा 29.1.2020 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व पंक्ति निम्न प्रकार थी।
"पाने वाले के खाते में देय चैक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट द्वारा किए जाने से अन्यथा किया जाता है, बीस हजार रुपए से अधिक हो जाता है"
3. आय-कर (तीसरा संशोधन) नियम, 2020 द्वारा 29.1.2020 लोप किया गया। लोप से पूर्व उपखंड (v), (vi) और (vii) निम्न प्रकार थी।
"(v) किसी बैंक खाते के माध्यम से इलेक्ट्रानिक समाशोधन प्रणाली का उपयोग;
(vi) किसी क्रेडिट कार्ड;
(vii) किसी डेबिट कार्ड ;"
4 ''बैंककारी कंपनी'' कंपनी की परिभाषा के लिए परिशिष्ट देखिए।
5. आय-कर (तीसरा संशोधन) नियम, 2020 द्वारा 29.1.2020 से लोप किआ गया। लोप से पूर्व खंड (ञ) निम्न प्रकार था।
"(ञ) जहां संदाय ऐसे किसी दिन किया जाना अपेक्षित था जिसको बैंक छुट्टी या हड़ताल के कारण बंद थे;"

